मेहंदीपुर बालाजी के नियम

*मेहंदीपुर बालाजी की कृपा पाने के मुख्य नियम*

भारत में अनेक रहस्यमयी और चमत्कारी मंदिर मौजूद है। इन्ही में से एक है राजस्थान के करौली जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर। मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में *हनुमानजी अपने बाल स्वरूप में विराजमान हैं*। यह एक ऐसा मंदिर जहां के दर्शन करते ही आपको विशेष तरह की सकारात्मक ऊर्जा महसूस होगी।
मेहंदीपुर बालाजी एक जागृत तीर्थ स्थान है अर्थात यह बहुत जल्दी कृपा करता हैं। इसलिए यहां किसी से भी डरना नहीं चाहिए क्योंकि जो इनके धाम में आ गया, उस पर इनकी कृपा होनी आवश्यक है। 

यदि हम सावधानी बरते तो हमें इनकी पूरी-पूरी कृपा प्राप्त होती है। अतः *यहां जाने के लिए हमें कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। इन्हीं को हम नियम भी कह सकते हैं।*

यहां दिए गए नियम आपको डराने के लिए नहीं है बल्कि आपको सावधान करने के लिए हैं ताकि आपको बाबा की ज्यादा से ज्यादा कृपा प्राप्त हो सके।

*मेहंदीपुर बालाजी की कृपा पाने के मुख्य नियम*

1★ यात्रा से पूर्व और बाद में सात्विक भोजन प्रसाद ग्रहण करें।
2★अपने शरीर को पवित्र बनाए रखने का प्रयास करें। इसीलिए मंदिर में प्रवेश से पहले स्नान करें और स्वच्छ कपड़े धारण करें। इसके लिए आप धुले हुए या फिर नए एक जोड़ी कपड़े अवश्य ले चले।
3★ श्री प्रेतराज सरकार के दरबार में अर्जी लगाएं। अर्जी दुकानों पर मिलती हैं, आप वहां से खरीद सकते हैं।
4★ दर्शन पंक्ति में भजन, कीर्तन, मंत्र जाप और जयकारों में  मन को लगाए रखें। 
5★ चमड़े की बेल्ट, पर्स या सुगंधित (perfume) वस्तुओं (क्रीम, पाउडर, सेन्ट, लिपिस्टिक, सुगंधित तेल, कोलगेट जैसी सुगंधित वस्तुएं) आदि का प्रयोग न करें और न ही मंदिर में ले जाएं।
6★ हम दर्शन करने के लिए आए हैं अतः मंदिर में फोटो या वीडियो न बनाएं केवल बाबा के दर्शन करें।
7★ दरबार में चिल्लाने या अलग व्यवहार करने वाले लोगों से दूर रहें। उन्हें न तो छुए और न ही उनका रास्ता रोके। इनसे डरे नहीं, इन्हें भक्त की नजर से देखे।
8★ वहां, चिल्लाने या अलग व्यवहार करने वाले पीड़ित लोगों को देखकर हंसने या कमेंट करने से भी बचना चाहिए। ऐसे भक्तों को आगे जाने देने के लिए रास्ता खाली छोड़ देना चाहिए।
9★ आप मंदिर में अपने पैसों और चढ़ाने वाले प्रसाद के सिवाय खाने-पीने की कोई भी वस्तु लेकर न जाए। इसीलिए मंदिर में प्रवेश से पहले कोई भी और किसी भी तरह की खरीदारी न करें क्योंकि मंदिर के अंदर गया हुआ सामान वापस नहीं लाया जाता।
10★ मंदिर में किसी भी वस्तु को न छुएं और न ही उठाएं और मंदिर में स्वयं प्रसाद न चढ़ाएं वहां उपस्थित सेवादार ही प्रसाद चढ़ाएगा। 
11★ यदि मंदिर से भोग प्रसाद की डिब्बी प्राप्त होती है तो खुद को भाग्यशाली समझे। उस प्रसाद को अपने घर लेकर आए और परिवार के सभी जन मिल बांटकर खाएं और उस खाली डिब्बे को ऐसे ही न फैंके बल्कि उसको जलाकर उसकी राख किसी गमले में डालें। मंदिर से मिले महाभोग प्रसाद की डिब्बी को छोड़कर मंदिर से कोई भी सामान जैसे प्रसाद आदि वापस न लाएं। 
12★ इस मंदिर के बारे में ऐसा माना जाता है कि मेहंदीपुर बालाजी मंदिर से आपके द्वारा चढ़ाए गए प्रसाद के साथ-साथ वहां गया खाना, पानी, बोतल या कोई भी चीज को मंदिर बाहर लेकर नहीं निकलना चाहिए, उसे वहीं छोड़ देना चाहिए।
13★ मंदिर  के प्रांगण में अंतिम देहली आने तक अगर कोई आपको पीछे से आवाज दे तो भूलकर भी पीछे मुड़कर नहीं देखें और न ही किसी को आवाज लगा कर बुलाएं। 
14★ बालाजी के दर्शन के बाद भगवान श्रीराम और माता सीता के दर्शन करके व्यक्ति को बिना पीछे देखे वापस बाहर निकल जाना चाहिए। 
15★ यदि कोई व्यक्ति आपको प्रसाद देता है तो हाथ जोड़कर मना करें। अगर वह न माने तो उससे प्रसाद सम्मान के साथ लेकर ऐसे स्थान पर रख दें, जहां वह पैरों में ना आए। 
16★मंदिर दर्शनों के उपरांत आप अपने खाने पीने के लिए कोई भी खरीदारी करने के लिए स्वतंत्र हैं। परंतु यह सामान वही खाकर  समाप्त करना होता है। खाने से जो बच गया या जो खुल गया उसे वहीं छोड़ देना चाहिए। 

*इन नियमों का पालन करने से बालाजी की कृपा प्राप्त होती है और यात्रा सुखद बनती है।*
 

Comments

Popular posts from this blog

अयोध्या-काशी-(बनारस)-सारंगनानाथ-(सरनाथ) और प्रयागराज संगम स्नान यात्रा 22 से 26/27 जनवरी 2026

सीहोर, उज्जैन और ओकारेश्वर यात्रा 24 से 29 जून 2025 लगभग 25 प्रमुख दर्शनीय स्थल व मंदिरों के दर्शन।

कुंबरेश्वरधाम (सीहोर); उज्जैन और ओकारेश्वर यात्रा 15 से 19 जनवरी 2026 लगभग 25 प्रमुख दर्शनीय स्थल व मंदिरों के दर्शन।